आज से लगभग 200 वर्ष पूर्व जब जांगिड़ परिवार के सदस्य रावलियावास से चांदारूण की ओर चल रहे थे तभी एक सदस्य के शरीर में कंपन सी महसूस हुई फिर कुछ देर बाद चांदारूण गांव से 1 किलोमीटर दूर श्याम बाबा के दर्शन हुए,
यह बात पूरे परिवार में फैल गई इसलिए परिवार के सदस्यों ने चांदरूण के खेजड़ी वृक्ष के नीचे एक पत्थर रखकर उसे मूर्ति के रूप में स्थापित कर दिया।
और उसकी पूजा अर्चना की , लेकिन उस समय लोगों के दिलों में भक्ति की ऐसी भावना नहीं थी।
चांदारूण के राठौड़ परिवार के महावीर सिंह ने 2019 में श्री श्याम बाबा की मूर्ति स्थापित की | उसके बाद कोरोना का समय आ गया और सभी मंदिर बंद हो गए | सभी दर्शनार्थी खाटू श्याम बाबा मंदिर में दर्शन करने जाते थे लेकिन कोरोना के कारण खाटू श्याम बाबा मंदिर बंद कर दिया गया।
श्याम बाबा को खाटू श्याम जी के नाम से भी जाना जाता है। यह भगवान श्रीकृष्ण के ही एक रूप माने जाते हैं। श्याम बाबा का वास्तविक नाम बर्बरीक था, जो महाभारत के महान योद्धा और घटोत्कच (भीम के पुत्र) के पुत्र थे। उन्हें भगवान श्रीकृष्ण ने वरदान दिया था कि कलियुग में लोग उन्हें मेरे नाम ‘श्याम’ से पूजेंगे।
इतिहास स्थानीय मान्यता के अनुसार, बर्बरीक ने युद्ध में भाग लेने से पहले स्वेच्छा से अपना शीश भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित कर दिया था। कहा जाता है कि उनका शीश वर्तमान राजस्थान के खाटू गांव में प्रकट हुआ, जहाँ एक गाय प्रतिदिन एक विशेष स्थान पर दूध गिराती थी। खुदाई के दौरान प्राप्त हुए इस शीश को एक ब्राह्मण को सौंपा गया।
आरती कीजै श्याम बाबा की,
दयालु दीनों के सहारा की।
श्याम सलोना रूप है न्यारा,
मोर मुकुट सिर, कंठ बसे बंसी प्यारा।
भाल तिलक, मुरली की धुन प्यारी,
देखत ही बन जाए सवारी॥
आरती कीजै श्याम बाबा की,
दयालु दीनों के सहारा की।
गदा, ध्वजा और रथ पर सवारी,
दीनन के तुम हो रखवारी।
नाम तुम्हारा संकट हरता,
मन में जो धर ले वही तरता॥
आरती कीजै श्याम बाबा की,
दयालु दीनों के सहारा की।
खाटू नगरी सुंदर भारी,
जहाँ बसे श्याम प्यारे हमारी।
जो भी भक्त चरण में आता,
श्याम कृपा से सुख पाता॥
आरती कीजै श्याम बाबा की,
दयालु दीनों के सहारा की।
श्याम नाम जब लो तन-मन से,
कष्ट मिटें सब जीवन से।
जो भी तेरा नाम पुकारे,
श्याम सहारा उसका तारे॥
आरती कीजै श्याम बाबा की,
दयालु दीनों के सहारा की।
श्याम बाबा का असली नाम बर्बरीक था। वे महाभारत काल में भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र थे। उन्हें खाटू श्याम, हारे का सहारा, शीश का दानी, और कलियुग के अवतार जैसे नामों से भी जाना जाता है।
बर्बरीक , श्याम , खाटू श्याम , हारे का सहारा , शीश का दानी , कलियुग के अवतार , मोरवीनंदन , लखदातार , तीन बाणधारी , खाटू नरेश , लीला के अस्वर
प्रतिवर्ष फाल्गुन महीने में विशाल मेला लगता है इस दौरान मंदिर लगातार 24 घंटे खुला रहता है इस मेले में निशान यात्रा शोभायात्रा रात्रि भजन और हर दिन विशेष आयोजन होते हैं
शुक्ल पक्ष एकादशी पर मंदिर पूरे दिन खुला रहता है
श्री श्याम बाबा का जन्मोत्सव कार्तिक शुक्ल एकादशी को मनाया जाता है इस अवसर पर मंदिर में विशेष कार्यक्रम जैसे भोजन और भजन कीर्तन होते हैं